बच्चों से बलात्कार के मामले में विशेष कानून की जरूरत (पॉस्को कानून की विफलता) The Rape of Children In Need of Special Legislation (Posco Law Failure) –Social Issues

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• 2015 में ब्रिटेन के एक नागरिक ने मद्रास उच्च न्यायालय में उसके खिलाफ चल रही यौन शोषण की कार्यवाही को समाप्त करने की याचिका दायर की। मद्रास उच्च न्यायालय ने उसकी माँग को ख़ारिज कर दिया और केंद्र को बाल यौन शोषण के आरोपितों को नपुंसक बनाने पर विचार करने का सुझाव दिया।

• इसी क्रम में 2016 में सुप्रीम कोर्ट वूमेन लॉयर्स एसोसिएशन (सर्वोच्च न्यायालय महिला वकील सभा) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने संसद को इस तरह के अपराधों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान वाले कानून पर विचार करने की सलाह दी।

पॉस्को कानून: एक परिचय

• 14 नवम्बर 2012 से प्रभावी यौन अपराध से बाल संरक्षण अधिनियम (पीओएससीओ), 2012 तक व्यापक कानून है जिसके तहत यौन उत्पीड़न, यौन शोषण तथा पोर्नोग्राफी से बच्चों को संरक्षण प्रदान करने के प्रावधान दिये गए हैं। इसके अनुसार न्यायिक प्रक्रिया में अपराध की रिपोटिंग (विवरणो), सबूतों की रिकॉर्डिंग (ध्वनि, चित्र आदि को टेप, फिल्म आदि पर कैद करने की प्रक्रिया) तथा अन्य सभी प्रक्रियाओं में बच्चों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। साथ ही ऐसे अपराधों के शीघ्र निपटान और स्पीडी ट्रायल (द्रुतगामी परीक्षण) हेतु विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाएगी।

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