भारत में आरक्षण (Reservation In India)

Download PDF of This Page (Size: 190K)

सुर्खियों में क्यों?

• राजस्थान में गुर्जर, आंध्र प्रदेश में कापू, गुजरात में पटेल और हरियाणा में जाट समुदाय के लोग उन्हें ओबीसी श्रेणी में शामिल करने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि वे कोटा प्रणाली का लाभ उठा सकें।

संवैधानिक प्रावधान

अनुच्छेद 15 (3)- राज्य बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है।

अनुच्छेद 15 (4)- राज्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गो या अनुसूचित जाति और जनजाति के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है।

अनुच्छेद 16 (4)- राज्य नागरिकों के किसी भी पिछड़े वर्ग के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर सकता है।

अनुच्छेद 46 - इस अनुच्छेद का संबंध अनुसूचित जातियों, जनजातियों, और समाज के अन्य कमजोर वर्गो के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने से है।

सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले

मंडल कमीशन (आयोग) मामला- इसके तहत सुप्रीम न्यायालय ने कुल सुरक्षित कोटा को 50 प्रतिशत तक प्रतिबंधित किया और अन्य पिछड़ी जातियों के उन्नत भाग (क्रमी लेयर) को आरक्षण के लाभ से अपवर्जित किया है।

न्यायमूर्ति ओ. चिनप्पा रेड्डी के दव्ारा दिये गये वर्ष 1985 के फैसले में कहा गया कि उच्च वर्गो के दव्ारा ’दक्षता’ को आवरण के रूप में इस्तेमाल कर, पिछड़े वर्ग के लिए निर्धारित लाभों को नहीं उठाया जा सकता। इसमें उच्च पदों और व्यावसायिक संस्थानों में वर्ग विशेष का एकाधिकार बना रहेगा।

जाट आरक्षण- उच्च न्यायालय ने यह विचार व्यक्त किया है कि जाति और ऐतिहासिक अन्याय को आरक्षण प्रदान करने के एक मात्र मानक नहीं है। राज्य ’किन्नरो’ जैसे समूहों को भी समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए वर्तमान आरक्षण प्रदान कर सकता है।

भारत में आरक्षण की आवश्यकता क्यों हैं?

• समाज के वंचित वर्ग के सामाजिक सशक्तिकरण के लिए एवं

• शैक्षिक और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर भेदभाव में कमी लाने के लिए।

Get unlimited access to the best preparation resource for IAS - Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Developed by: