वर्ल्ड (विश्व) एम्प्लॉयमेंट (रोजगार) एंड (और) सोशल (सामाजिक) आउटलुक (दृष्टिकोण) रिपोर्ट (विवरण) (World Employment and Social Outlook Report) for RSET

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सुर्ख़ियों में क्यों?

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने हाल ही में वर्ल्ड एम्प्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलुक -ट्रेंडवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू स (निविदाओं) रिपोर्ट 2016 जारी की है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष

  • इसमें अनुमान लगाया गया है कि भारत में बेरोजगारों की संख्या 2016 में 17.7 मिलियन (दस लाख) से बढ़कर 2018 तक 18 मिलियन हो जाएगी। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2017 में रोजगार की दर 3.5 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत हो जाएगी।

  • रिपोर्ट में ’वल्नरेबल (दोषपूर्ण) एम्प्लॉयमेंट’ (रोजगार) से संबंधित पूर्वानुमानों को सम्मिलित किया गया है।

वल्नरेबल एम्प्लॉयमेंट

  • आईएलओ के अनुसार, असुरक्षित रोजगार स्वरोजगार कार्मिक और परिवार के अवैतनिक श्रमिकों को शामिल करता है।

  • इनके पास बेहतर कार्य दशाओं, सामाजिक सुरक्षा या किसी यूनियन (संघ) में प्रतिनिधित्व का अभाव होता है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के बारे में

  • इसकी स्थापना 1919 में प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय की संधि के एक भाग के रूप में की गई थी।

  • यह एकमात्र त्रिपक्षीय संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (शाखा) है, जो सरकारों, नियोक्ताओं और सदस्य राज्यों के श्रमिकों को एक साथ लाती है।

  • इसका उद्देश्य सभी महिलाओं और पुरुषों के लिए गरिमापूर्ण कार्य को बढ़ावा देने के लिए श्रमिक मानकों, नीतियों और कार्यक्रमों को निर्धारित करना है।

  • भारत आईएलओ का संस्थापक सदस्य है।

  • इसके तीन मुख्य निकाय हैं-

  • अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन -यह श्रम मानकों और व्यापक नीतियों को निर्धारित करता है।

  • प्रशासी निकाय- यह कार्यकारी निकाय है जो अंतिम निर्णय लेता है।

  • अंतरराष्ट्रीय श्रम कार्यालय -यह आईएलओ का स्थायी सचिवालय है जिसका पर्यवेक्षण शासी निकाय दव्ारा किया जाता है।

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