राष्ट्र-रुप

हिमालय से सागर का पार

धरे विविधता का भेष

पहने एकता का हार

है यह महान भारत देश।

गाँधी, अरविन्द, नेहरु, सुभाष

टैगोर, इंदिरा, अटल महान्‌

करते सदैव जिसका गुणगान

आओ करे हम उसे सलाम।

विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में

अंकित इसकी गौरव गाथा

प्रताप शिवाजी से वीरों पर

झूका जाता है सबका माथा।

विगत पाँच दशकों में हमने

बहुत कुछ कर दिखाया है।

हरित, श्वेत व नील क्रांति से

देश को आत्मनिर्भर बनाया है।

पर कुछ स्वार्थी सत्ताधीशों ने

आज ऐसा कुचक्र चलाया है

राम राज्य का सपना टूटा

रावण सा आतंक मचाया है।

संकल्प हमारा है अब यह

भारत को महान्‌ बनावेंगे

दूर अंधेरे को करके

दूर अंधेरे को करके

पुन: विश्व गुरु कहलाऐगें।

Author: Manishika Jain